श्री शिव प्रसाद संस्कृत महाविद्यालय की वैब साइट पर आपका स्वागत है।

हर शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान वर्धन होता है, लेकिन केवल ज्ञानार्जन से व्यक्तित्व और समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं होती।

उन्नत समाज और देश, दोनों को ज्ञानी, विवेकशील, चरित्रवान एवं सुसंस्कृत नागरिकों की आवश्यकता होती है। उसी से देश अपनी पहचान बनाता है, उसी से वह आगे बढ़ता है और उसी से उसकी प्रगति होती है। यह निश्चित है कि इससे कम में बात बनती नहीं है।

श्री शिव प्रसाद संस्कृत महाविद्यालय में हम प्रयत्नरत् हैं कि, हमारी भारतीय संस्कृति और संस्कार जो आधुनिक समय के हाँथों बिखर गए हैं, उन्हें पुनः समेटा जाए, उन्हें सजीव किया जाए और उन्हीं को विकसित व्यक्तित्व का आधार बनाया जाए।

हम जानते हैं कि प्रथम दृष्टि में यह काम अत्यन्त विशाल कठिन एवं असंभव प्रतीत होता है, लेकिन जब इस कार्य को बालकों एवं बालिकाओं की प्रारम्भिक शिक्षा के साथ जोड़ कर देखा जाता है तो आशा की अनेकों किरणें दिखाई देने लगती हैं और प्रेरणाएं मिलने लगती हैं कि कार्य का शुभारंभ किया जाए।

आपका इस वेबसाइट पर आना, हमारे लिए प्रेरणादायक है और हमारी प्रसन्नता का कारण भी। हम उत्साहित हैं कि आप इस कठिन यात्रा में हमारे साथ हैं।

आइए मिल कर प्रयास करें कुछ बदलने का, और आस पास के लोगों में यह विश्वास जगाने का, कि आज पूरे मन से किया गया प्रयास, कल की बहुत बड़ी सफलता बन सकता है।


our-school-900-600

हमारा विद्यालय, हमारा विश्वास

श्री शिव प्रसाद संस्कृत महाविद्यालय ज्ञानार्जन का एक पवित्र स्थान ही नहीं अपितु हमारी एक सांस्कृतिक धरोहर भी है।

प्राधानाचार्य के अनवरत प्रयत्न और शिक्षकों के अथक प्रयास, विद्यार्थियों को गहन अध्ययन तो करा ही रहे हैं, साथ ही उनके बाल मन को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से इस तरह प्रभावित कर रहे है कि यह सब उनके स्वाभाव और व्यक्तित्व में प्राकृतिक रूप से समा सके।

हमारा यह विद्यालय, भारतीय संस्कृति को, नव पीढ़ी के आचरण में  साकार करने का एक छोटा सा प्रयास है।

हमारा यह प्रयास आज छोटा भले ही हो लेकिन कल इसका प्रभाव बड़ा हो कर जन-जन को दिखेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।

1-3

हमारे बढ़ते कदम

हम जो कार्य करना चाहते हैं वह निश्चय ही विशाल है। हमारे संसाधन सीमित हैं। लेकिन हमारा मानना है कि हमारे पास जो है, वही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
हमारी शक्ति ही हमें, अब तक मिली सफलताओं की बार-बार याद दिखाती है और निरन्तर आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करती है।
जिस प्रकार एक पहलवान अपनी शक्ति का प्रयोग, व्यायाम एवं वर्जिश करके, अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए करता है, उसी प्रकार हम भी छोटी छोटी सफलताओं से और उनसे उत्पन्न आत्म-संतोष से अपने मनसूबों को और सशक्त बना रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं।
यह विद्यालय वर्षों पुराना है। इसका अपना एक इतिहास है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि विद्यालय काफी समय पहले, तेज भागती आधुनिकता के पैरों तले रौंदा गया था, अभावों का शिकार हुआ था। इसकी चमक, जो कभी इसकी पहचान थी, धीरे धीरे धूमिल पड़ गई थी और यह विद्यालय लगभग नष्ट सा हो गया था।
यह सच है कि कभी कभी, जीवित रहने की चाह ही जीवन-परिवर्तन का कारण बनती है। वही लोगों की सोच बदलती है। नए लोगों को नए उत्साह के साथ जोड़ती है और उनसे ऐसे कार्य करवाती है कि परिवर्तन सम्भव हो सके।
समय ने करवट ली, भारतीय संस्कृति को पुर्नजीवित करने की चाह प्रबल हुई और यह विद्यालय, इतिहास के पन्नों से निकल कर बाहर आने लगा।  यह ठीक वैसे ही था, जैसे अंडे को तोड़ कर कोई पक्षी बाहर आता है।

आज परिजनों का एक बड़ा समूह इस पक्षी को अपने प्रयत्न एवं प्रयासों से परिपोषित कर रहा है और यह पक्षी बड़ा हो रहा है।
हमें विश्वास है कि आप सभी परिजनों के सहयोग से यह पक्षी एक दिन भारतीय संस्कृति के आकाश में ऐसी उड़ान भरेगा जिस पर सभी सहयोग-कर्ताओं को आत्मसंतोष होगा और आप कहेंगे कि हमारे प्रयास सफल हुए।


हमारी शिक्षा संस्कृति और संस्कृत

भारतीय संस्कृति आज भी इस धरती की सबसे लोक प्रिय संस्कृति है।  यह संस्कृति सहयोग की संस्कृति है न कि विरोध की संस्कृति है।  इस संस्कृति का अनुयायी, हमारा यह विद्यालय, सर्व धर्मों सर्व भाषाओं और सर्व विषयों का सम्मान करता है और उन्हीं की शिक्षा देता है।
संस्कृत हमारी सांस्कृतिक भाषा है। हमारे विद्यालय में संस्कृत प्रारम्भिक कक्षाओं से पढ़ाई जाती है। हम जानते है कि हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषाएं देश, एवं विदेश की आवश्यकताएं है। अतः इन भाषाओं के ज्ञान द्वारा ही हम जनमानस को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि, इस विद्यालय में संस्कृत भाषा के साथ साथ हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषाएं भी सिखाई जाती हैं।
गणित, भूगोल, इतिहास, विज्ञान आदि का ज्ञान, विद्यार्थियों की प्रतिभाओं और क्षमताओं को व्यापक रूप देने के लिए आवश्यक होता है अतः हम विद्यार्थियों को सर्व विषयों का ज्ञान देते हैं, जैसा अन्य विद्यालयों में होता है।
आज के युग में कम्प्यूटर जीवन के हर क्षेत्र में प्रयोग किया जा रहा है। शिक्षार्थी कम्प्यूटर विज्ञान से वंचित न रहें, इसके लिए हम कुछ मौलिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। हम आशा करते हैं कि हम इस कार्य में शीघ्र सफल होंगे।
विद्यार्थियों में स्वाध्याय के प्रति रूचि जागृत करना, व्यक्तित्व निर्माण के प्रति उन्हें प्रेरित करना और अपने अन्दर छिपी प्रतिभाओं को पहचान कर, उनका विकास करना आदि ऐसे विषय हैं जिन के लिए हम हर ज्ञानवान एवं योग्य व्यक्ति को आमंत्रित कर रहे हैं कि वह हमसे संपर्क करें और योजनाबद्ध तरीके से विद्यार्थियों को समय-समय पर ज्ञान दें।

"
हमारी शिक्षा संस्कृति और संस्कृत
"
our-education

अभी मंज़िल दूर है

हम जानते हैं कि, लक्ष्य चाहे कितना भी बड़ा क्यूँ न हो, मंजिल कितनी दूर क्यूँ न हो, सफर का रास्ता कितना कठिन क्यूँ न हो, निरन्तर चलते रहने और प्रयास करते रहने से एक न एक दिन मंजिल मिल ही जाती है।
किसी दुरूह मंजिल के यात्री ने कभी कहा था:

''उम्मीद के साथ यात्रा करना, मंजिल पर पहुँचने से अधिक बेहतर होता है।  सच्ची सफलता, उसके लिए किए गए प्रयास में होती है।''

हम कदम दर कदम, मंजिल की ओर निरन्तर बढ़ रहे है। संसाधन जुटा रहे हैं। प्रतिभाओं को अपने साथ जोड़ रहे हैं। सामर्थ्यवानों को प्रेरित कर रहे हैं कि वह इस लम्बे सफर में कुछ दूर तक हमारे साथ चलें,हमें खुशी होगी, हमारा मनोबल बढ़ेगा और न जाने कितने अनपढ़ बच्चों को शिक्षा मिलेगी और न जाने कितनों का जीवन संवरेगा।


आमंत्रण

किसी भी वस्तु या स्थान के विषय में सुनने या पढ़ने से बेहतर होता है, उसे देखना। देखना कहीं ज्यादा अधिक प्रभावी क्रिया होती है।  वह सारे शक संशय दूर करती है।  अच्छी बुरी दोनों प्रकार की मनंगढन्त कल्पनाओं को विराम देती है और वास्तविक वस्तुस्थिति से परिचित कराती है।
हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि एक बार हमारे विद्यालय आकर बच्चों से मिलें, उनके अन्दर शिक्षा ग्रहण करने की जो ललक है, उसे देखें और परखें कि इस ललक को पूरा करने में हम किस हद तक सफल हुए हैं और क्या क्या किस तरह किया जा सकता है।
यदि आप विद्यालय भ्रमण के इच्छुक है, तो नीचे दिए फार्म को भरें और सबमिट (Submit)करें।

invitation1-1